
सोचिए आप एक नई-नवेली सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं, लेकिन सामने अचानक पेड़ आ जाएं! आप चौंक जाएंगे ना? लेकिन बिहार के औरंगाबाद जिले में ये हकीकत है। 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन चुकी हैं। लोग कह रहे हैं, “सड़क भी मिली, जंगल का फील भी फ्री!”
क्या है पूरा मामला?
बिहार के जहानाबाद NH-83 पर डीएम ऑफिस के पास एक 8 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसकी लागत थी पूरे 100 करोड़ रुपये। सड़क बनी भी और देखने में बेहद शानदार लगती है। लेकिन बीच में कुछ ऐसा हुआ, जिससे पूरा प्रोजेक्ट मजाक बन गया।सड़क के बीचों-बीच पेड़ खड़े रह गए, जैसे सड़क पर ही परेड कर रहे हों!
पेड़ क्यों नहीं हटाए गए?
इस चौंकाने वाले नज़ारे के पीछे की वजह भी उतनी ही अजीब है: ठेकेदार ने जब सड़क बनानी शुरू की, तो पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिली। जिला प्रशासन ने वन विभाग से अनुमति मांगी, लेकिन जवाब में विभाग ने 14 हेक्टेयर वन भूमि के बदले मुआवजा मांगा। प्रशासन वो शर्तें पूरी नहीं कर सका और नतीजतन, सड़क को पेड़ों के बीच से ही बना दिया गया।
सोशल मीडिया पर बना मज़ाक का पात्र
इस सड़क की तस्वीरें वायरल होते ही लोग मजेदार कमेंट्स कर रहे हैं: “ये तो इको-फ्रेंडली सड़क है, पेड़ों को गले लगाने वाली।”
“100 करोड़ में सड़क भी मिली, और जंगल सफारी का मजा भी फ्री!”
गंभीर सवाल भी उठते हैं जहां ये मामला मज़ाक लग रहा है, वहीं ये एक गंभीर प्रशासनिक चूक भी दर्शाता है।
100 करोड़ की योजना में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई?
क्या विभागों के बीच समन्वय की इतनी कमी है? और क्या जनता की सुरक्षा का कोई ख्याल नहीं रखा गया?
अब आगे क्या?
अब देखना ये है कि सरकार और प्रशासन इस “पेड़ों वाली सड़क” का क्या समाधान निकालते हैं। तब तक अगर आप जहानाबाद की ओर जाएं, तो गाड़ी धीरे चलाएं, क्योंकि पेड़ भाई रास्ते में स्वागत के लिए तैयार हैं!
निष्कर्ष:
इस घटना ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि सिर्फ बजट से नहीं, बल्कि सही योजना, समन्वय और ज़िम्मेदारी से ही विकास संभव है। वरना सड़क पर पेड़ खड़े रह जाएंगे, और जनता सोचती रह जाएगी – ये सड़क है या जंगल?
